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108 कुंडीय महायज्ञ : ‘आस्था’ का सागर बनी गायत्री शक्तिपीठ

बलिया। मनोहारी छटां, एक साथ 108 कुंडीय यज्ञ, देवपूजन, तत्व देवी पूजन, लघुरूद्र सर्वोभद्र पूजन व श्रद्धा का समर्पण भाव के साथ वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज से भृगुनगरी की फिजां गहगह हो चुकी है। गायत्री शक्तिपीठ महावीर घाट पर आयोजित मां गायत्री की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन शक्तिपीठ इलाहा की नहीं, बल्कि पूरे नगर व आस-पास के गांव तथा पड़ोसी जनपद से भी हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

मंच पर प्रधान कलश एवं अखण्ड दीप की पूजा मुख्य यजमान हंसराज ने सपत्नीक किया। इसके साथ ही श्रीमती ललिता त्रिपाठी, हेमवंती पाण्डेय, कंचन चौबे, उषा मिश्रा, अन्नपूर्णा पाण्डेय, रामचन्द्र, प्रभाकर दूबे, विवेक सिंह, डॉ. आलोक चौबे, संजय कुशवाहा आदि गायत्री साधक परिजन के रूप में नर-नारी उपस्थित रहे। मंच का संचालन गाजीपुर के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेन्द्र सिंह व बलिया गायत्री महायज्ञ के मीडिया प्रमुख डॉ. विजयानंद पाण्डेय ने संयुक्त रूप से किया। आगन्तुकों व विशिष्ट अतिथियों के प्रति अखिल भारतीय गायत्री परिवार के जोनल प्रभारी प्रसेन सिंह व जिला गायत्री परिवार के प्रमुख विजेन्द्र नाथ चौबे ने संयुक्त रूप से आभार प्रकट किया। छह जनवरी को शाम पांच बजे से भव्य दीप महायज्ञ एवं संगीत प्रवचन होगा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पांड्या शामिल होंगे।

सबसे श्रेष्ठ कार्य यज्ञ: पं. नमोनारायण पांडेय

महायज्ञ के पहले दिन शायंकाल संगीत प्रवचन में पं. नमोनारायण पाण्डेय जी ने कहा कि श्रेष्ठ कर्म की परिभाषा में भजन पूजन, योग-ध्यान, तप-तितिक्षा, सेवा-दान, तीर्थ-दान, चिकित्सा-दवा श्रेष्ठ कार्य तो है, लेकिन सबसे श्रेष्ठ कार्य यज्ञ ही है। वेद में लिखा है कि यज्ञ वै श्रेष्ठतम्। यही नहीं, यज्ञ हमारी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। राजा दशरथ जी की तीन रानियों के बाद भी चौथेपन तक जब कोई संतान नहीं हुआ तो गायत्री साधक गुरू वशिष्ठ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ के आचार्य श्रृंगी ऋषि को बुलाकर यज्ञ कराया। फिर एक नहीं, चार-चार पुत्र प्राप्त हुए। कहा कि साधारण अग्नि जहां लग जाती है, वहां सबकुछ जलकर राख हो जाता है, किन्तु वहीं अग्नि हवन कुंड में आवाह्न द्वारा प्रज्जवलित होती है और मंत्र की ऊर्जा प्रदान की जाती है तो वह हमारी मनोकामना पूर्ण करने में समर्थ हो जाती है।

स्वास्थ्य शिविर का लाभ लें रहे श्रद्धालु

महायज्ञ में होमियोपैथिक एवं आयुर्वेदिक विभाग द्वारा आयोजित नि:शुल्क चिकित्सा शिविर आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। चिकित्सा प्रमुख पूनम पाण्डेय ने बताया कि होमियोपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. विमलेश पाण्डेय ने 226 तथा आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. रामजी गुप्त व सतीश कुमार उपाध्याय ने 174 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाईयां दी। वहीं, आयुष योग प्रशिक्षिका श्रीमती नम्रता तिवारी ने नियमित योग, प्राणायात आदि का प्रशिक्षण दिया। बताया कि शांति देवी नेत्रालय द्वारा आयोजित नेत्र शिविर का उद्घाटन भाजपा नेता डॉ. बद्री नारायण गुप्त ने किया। इस मौके पर सुनिता पासवान, राजेन्द्र तिवारी, जंगबहादुर, हरिपन्न तिवारी, बृजकिशोर चौबे, ओमप्रकाश वर्मा, राकेश पाण्डेय, डॉ. डीजे पाण्डेय, डॉ. अशोक कुमार, अनुप्रिया, रियाजुल हक अंसारी, सतीश राउत, हरिलाल, पंकज कुमार, सीमा चतुर्वेदी, हर्षिता पाण्डेय आदि सहयोग में रहे।
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