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तीन टुकड़ों में बंटेगा पिछड़ों का आरक्षण !

लखनऊ। प्रदेश में सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक संग्राम छिड़ने के आसार हैं। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी रिपोर्ट में पिछड़ों के आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की है। ये तीन हिस्से पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा के रूप में होंगे। इनका अनुपात सात, 11 और नौ प्रतिशत के रूप में होगा। भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल ने जहां इस प्रस्ताव का विरोध किया है, वहीं सरकार में सहयोगी दल के मंत्री सुहेलदेव भारतीय समाज के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने रिपोर्ट लागू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

राज्य सरकार ने पिछड़ों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और नौकरियों में उनकी भागीदारी के अध्ययन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने ओबीसी के 27 फीसद आरक्षण को तीन भागों में 7-11-9 के फॉमरूले पर बांटने की सिफारिश की है। पिछड़ा को सात फीसद आरक्षण, अति पिछड़ा को 11 फीसद और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को नौ फीसद आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। समिति ने पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, अति पिछड़ा में 59 और सर्वाधिक पिछड़ा में 79 जातियों को रखा है। समिति की रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग में यादव, ग्वाल, सुनार, कुर्मी समेत 12 जातियां हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू किया गया तो 27 प्रतिशत आरक्षण में इनका प्रतिनिधित्व काफी कम हो जाएगा।

समिति ने एससी/एसटी में भी दलित, अति दलित और महा दलित श्रेणी बनाकर इसे भी तीन हिस्से में बांटने की सिफारिश की है। एससी/एसटी वर्ग में समिति ने 87 जातियों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. दलित वर्ग में चार, अति दलित में 37 व महादलित में 46 जातियों को शामिल करने की सिफारिश की गई है।

हालांकि, रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन, इसको लेकर राजनीतिक दलों में महासंग्राम अभी से शुरू हो गया है। अपना दल की अध्यक्ष और केंद्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि वह आरक्षण के बंटवारे से तो सहमत हैं लेकिन, इसका आधार वैज्ञानिक होना चाहिए।

चुनाव बाद निर्णय होने के आसार

समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन, लोकसभा चुनाव बाद ही सरकार इस पर कोई निर्णय करने के मूड में है। लोकसभा चुनाव से पहले यदि इसे लागू किया जाता है तो नुकसान में आने वाली पिछड़ों की जातियां लामबंद हो सकती है, जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा। राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भी पिछड़ों के सामाजिक अध्ययन को समिति का गठन किया गया था जिसे बाद में कोर्ट ने अमान्य कर दिया था।

रिपोर्ट का अध्ययन कराया जा रहा: अपर मुख्य सचिव

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट उनके पास परीक्षण के लिए भेजी गई है। अभी इस पर विधिक परीक्षण के साथ ही अन्य विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी।

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