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अपनी बात

चीखते चिल्लाते नारों के बीच अनसुनी आवाजें

देश में सेमी हाईस्पीड वंदे भारत चलने लगी है, प्रतिदिन जहां औसतन 11 किलोमीटर सड़क बनती थी अब 32 किलोमीटर बन रही है, बिजली भरपूर मिल रही है, प्रतिव्यक्ति आय बढ़ गई है तथा और भी बहुत कुछ हो रहा है। लेकिन बलिया के ग्रामीण अंचल से निकल कर अच्छी पढ़ाई के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीए-एमए करने वाला युवा …

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सवाल और सियासत…

लोकतंत्र प्रश्नों पर टिका है। या यूं कहें तो हमारे मौलिक अधिकारों में एक, सवाल पूछना भी है। लेकिन आज इस पर बड़ा संकट है। स्कूलों में हम बच्चों को इस बात के लिए प्रेरित करते है कि सवाल पूछो। इससे दिमाग तेज होता है। लेकिन हम खुद भूल जाते है। दरअसल, सोशल मीडिया का असर इतना हुआ कि हमने …

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प्रत्येक 6 में एक आदमी झेल रहा जल संकट, पूर्वांचल भी बन रहा डार्क जोन

अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के भूगोल विभागाध्यक्ष एवं पर्यावरणविद् डा. गणेश कुमार पाठक ने कहा कि वर्तमान जल संकट मानव की भोगवादी प्रवृत्ति, विलासिता पूर्ण जीवन, अनियोजित तथा अनियंत्रित विकास एवं जल की शोषणपरक नीति की देन है। जल स्रोतों के अनियोजित एवं अनियंत्रित उपयोग के चलते एक तरफ जहां जल की बर्बादी से जल संकट की स्थिति …

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गिले-शिकवे भूलकर खेलें प्रेम-स्नेह का रंग

होली का त्योहार आपसी भाईचारा का त्योहार है। यह त्योहार आपसी कटुता को भूलाकर प्रेम सद्भावना प्रकट करता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस त्योहार को अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में मनाया जाता है। सत्य की कसौटी पर परखने के बाद भक्त प्रह्लाद ने अपने पिता को भगवान मानने से इंकार कर दिया था।भले प्रहलाद को कठिन कष्ट …

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बदलती सियासत का अंत

तकरीबन पांच साल पहले स्कूटी पर सवार एक शख्स की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। देखते ही देखते तस्वीर पूरी तरह छा गयी थी। वह तस्वीर थी गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की। जिस वक्त हम यह मान चुके थे कि सियासत की डिक्शनरी से सादगी शब्द हट चुका है, इस तस्वीर ने देश के करोड़ों लोगों को …

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किसी पर भरोसा करने से पहले देख लेनी चाहिए ये 4 चीजें

चाणक्य नीति के पांचवें अध्याय के दूसरे श्लोक में बताया है कि किसी पर भरोसा करने से पहले कौन सी बातों पर ध्यान देना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हर किसी पर आसानी से भरोसा नहीं करना चाहिए। चाणक्य के अनुसार जिस तरह से सोने को परखने के चार तरीके बताए गए हैं, वैसे ही किसी भी इंसान पर …

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जैसी सोच… उसी रूप में दिखेंगे भोलेनाथ

देवों के देव महादेव को भोलेनाथ, शंकर, महेश, रूद्र, नीलकंठ, गंगाधार, महाकाल, आदिदेव, किरात, चंद्रशेखर, जटाधारी, विनागनाथ, मृत्युंजय, त्रयंबक, महेश, विश्वेश, महारुद्र, उमापति, काल भैरव, भूतनाथ इत्यादि कई नामों से जाना जाता है। शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ? पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात भगवान भोलेनाथ और मां शक्ति का मिलन हुआ …

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बन्द कमरों में सड़ती रही लाशें… दोषी कौन?

“बन्द कमरे में दो महीने तक लाश सड़ती रही, बेटे ने दो महीने तक फ़ोन नहीं किया” खबरों पर हम घोर संवेदना तो व्यक्त कर देते हैं। अफसोस जाहिर कर लेते हैं और जब बहुत ज्यादा भावनात्मक होते हैं तो भगवान से प्रार्थना भी कर देते हैं कि ऐसा किसी भी बुजुर्ग के साथ न हो। भारतीय परंपरा में हर …

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सम्पूर्ण प्रकृति के पोषक हैं देवाधिदेव भ+ग+वा+न शिव

देवाधिदेव भगवान शिव के अनेक रूप हैं। एक तरफ जहाँ वो सत्यम्, शिवम् एवं सुन्दरम् के प्रतीक हैं तथा परिस्थिति के अनुसार संहारक रूप में चर्चित हैं और औघड़दानी के रूप में वरदान देने के लिए भी प्रसिध्द हैं, वहीं दूसरी तरफ भगवान शिव पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता अर्थात् सम्पूर्ण प्रकृति के भी रक्षक एवं पोषक हैं। चूँकि वो …

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आधुनिकता की चकाचौंध में औंधे मुंह गिरा ‘अइगा-बीजे’ का प्रेम

शादी विवाह का मुहूर्त चल रहा है, जिसे देखकर एक बात अक्सर याद आ रही है। वह है तब और अब। पहले के अपेक्षाकृत शादियों में खर्च की बात की जाय तो बीस गुना अधिक खर्च है। वहीं सम्बन्धो की बात जाय तो उतना ही प्रेम में कमी भी दिख रहा है। भले ही भींड़ जुट जा रही है। वीआईपी …

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