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अपनी बात

तरस आ रही है, ‘कहां गया जमाना-कहां आ गए हम’

जमाना बदल गया। अपनो को मजबूत करने की बजाय कमजोर करना ही हम बुद्धिमता समझते हैं। तरस आ रही है। कहां गया जमाना। कहां आ गए हम। एक समय था जब चार भाई में एक भाई को गांव, समाज, रिश्तेदारी को संभालने के लिए गांव पर रख दिया जाता था। जबकि पहले के अपेक्षाकृत बहुत कुछ परिवार में भरा है। …

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नाचे बीच बाजार… जोमैटो: अथ बाजार कथा

एक गाना याद आ रहा- इश्क नचाये जिसको यार, वो फिर नाचे बीच बाज़ार… खैर, गाने के आगे का हिस्सा छोड़िये, केवल पीछे के हिस्से पर बात करें। मुझे लगता है आज इश्क कम, बाजार ही ज्यादा हमें बाजार में नचा रहा है। जोमैटो इसका ताजा उदाहरण है। फंस गए बिचारे सुकुल जी। लेकिन, उन्होंने केवल ऑर्डर कैंसिल किया था। …

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गोल्डन गर्ल हिमा दास का कुमार विश्वास ने कुछ यूं बढ़ाया हौंसला

नई दिल्ली। गोल्डन गर्ल हिमा दास की सफल उड़ान को आज हर को सलाम कर रहा है। अलग-अलग स्पर्धाओं में 5 स्वर्ण जीत चुकी भारतीय उड़नपरी हिमा दास ने दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस उड़नपरी को देश के वरिष्ठ कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कुछ यूं बधाई दिया है। ‘तुम दौड़ो @HimaDas8 जमकर दौड़ो, करोड़ों भारतपुत्रियो …

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स्टीम ब्वालर बन गया हैं बलिया शहर

प्रचंड गर्मी में बलिया शहर की सड़कों और गलियों से सूर्यास्त के बाद गुजरते हुए क्या आपने अनुभव किया है, जैसे आप किसी भाप के इन्जन के पास गुजर रहे हैं। जी हां, आप का अनुभव सही है। बेतरतीब और संकरी सड़कों वाला यह शहर शाम को स्टीम ब्वालर बन जाता है। आपके आस पास बने सीमेन्ट और ईंट से …

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बलिया वाया बनारस : इतिहास की कीमत पर नहीं बनेगा भविष्य

वाराणसी के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजय चतुर्वेदी ने आज फेसबुक पर दो तस्वीरें साझा की है गोदौलिया स्थित पुराने तांगा स्टैंड की, जिस पर हथौड़ा चल रहा है. यह भवन नहीं बनारस का इतिहास भी है, जिसकी कीमत पर हम शानदार भविष्य का सपना देख रहे हैं। सपने देखना उचित है, लेकिन यह भी समझना होगा कि उसकी कीमत …

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बलिया : मतगणना स्थल की व्यवस्था का कड़वा सच

बलिया जनपद के तिखमपुर स्थित मंडी समिति में 17 वें लोकसभा चुनाव का मतगणना हुआ। लोकतंत्र के महा पर्व में सबकी सहभागिता अतुलनीय रही। 19 मई को सातवें व अंतिम चरण का वोट था। मतदान से लेकर मतगणना तक पुलिस प्रशासन, बाहरी फोर्स की जितनी प्रशंसा की जाय कम होगी। विशेषकर 23 मई 2019 के मतगणना व्यवस्था की बात हो …

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बेलगाम बोल का भयावह शक्ल

बेलगाम बोल व बदमिजाज कार्यप्रणाली कितना भयावह शक्ल अख्तियार कर सकती है, यह सुभासपा के राष्द्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के प्रकरण से साबित हो गया। भाजपा के समर्थन से पहली बार सत्ता सुख लेने वाले ओमप्रकाश राजभर को यह गलतफहमी रही कि वह मायावती व अखिलेश यादव की कोटि के नेता हो गये हैं। इसलिए उन्होंने भाजपा को अपने …

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गांधी बनाम गोडसे

गांधी और गोडसे देश की आज़ादी के करीब 7 दशक बाद गांधी और गोडसे फिर से प्रासंगिक हो गए है। मुझे गांधी के बारे में बहुत नहीं पता। कुछ किताबों में पढ़ा था, और बहुत कुछ गोष्ठियों में सुना। गांधीवाद ने काफी तो नहीं, लेकिन कुछ हद तक प्रभावित किया है। फिलहाल जो मेरी कर्मस्थली है, मुजफ्फरपुर, गांधी से हद …

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माफ करना सरकार! आपके सिस्टम ने लूट लिया मेरा मताधिकार

अजीब विडम्बना है। वर्षों से इंतजार था। वोट देकर हम कवरेज में निकलेंगे। वोट देने से कोई वंचित न रह जाय। इसके लिये भी हम सभी जागरूक कर रहे हैं। आगामी 19 मई यानी कल ही बलिया में मतदान होना है। बहुत ही दुख हुआ। मेरा ही नहीं, बल्कि मेरे परिवार के 6 लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब …

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नफरतों की राजनीति और जहरीला बचपन

ये दौलत भी ले लो,ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी जगजीत सिंह का गाया हुआ ये गाना चिरकालिक है,लिखते समय जितना प्रासंगिक था लिखने से पहले और आज भी उतना ही प्रासंगिक है। चाहे अमीर हो या गरीब हर व्यक्ति …

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