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मेरे उजड़े गांव में अब भी राम बसते हैं…

मेरे उजड़े गांव में अब भी राम बसते हैं बूझ मेरा क्या नाव रे नदी किनारे गांव रे, पीपल झूमे मोरे आंगना ठंडी ठंडी-छांव रे बहुत दिनों की बात है जब मेरे गांव की युवतियां अलढपन में यूँ पहेलियाँ पूछा करती थीं पर अब न वो नदी रही, न वो पीपल का पेड़, न वो आँगन और नाही वो गाँव। …

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‘ए काका हथिया चढ़ि गईल बीया, लवना-लकड़ी धइ ले बे के बा’

‘ए काका हथिया चढ़ि गईल बीया, लवना- लकड़ी धई ले बे के बा’। ये बातें वर्षों पहले ग्रामीण इलाकों में सुनने को मिलती थी। हालांकि भारत गांवों का ही देश कहा जाता है और गांवों से लोग शहर में आये हैं। यही वर्षात है, जब उन दिनों गैस का चूल्हा घर में नही रहता था। झोपड़ी, कच्चे मकान ही हुआ …

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विलीन होती यादें… दोषी कौन, गंगा या प्रशासन ?

मानवीय सभ्यता का इतिहास पढ़ाते वक़्त प्राइमरी कक्षाओं में ये पढ़ाया जाता है कि इंसान ने जब गुफाओं से निकलकर नदियों की ओर पलायन किया तो उसने खेती करने का हुनर सीखा। अनाज को संग्रहीत किया।खेती में ज्यादा लोगों की जरूरत थी तो उसने परिवार बसाना शुरू किया। परिवार से समाज और फिर सभ्यता विकसित हुई। सभ्यता जिसने इंसान को …

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एहसान का दिखावा न करें साहब ! सरकार ने जो दिया है वही हमें दें

प्रयागराज से लेकर बलिया जनपद तक गंगा नदी का कहर क्या रहा। सब को पता है। बाढ़ की विभीषिका बैरिया तहसील से लगायत सदर तहसील तक के बाढ़ प्रभावित इलाका का दर्द देखकर समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सुनते ही 24 घण्टा के अंदर बैरियाँ इलाका में खुद आकर न सिर्फ हवाई सर्वेक्षण किये बल्कि राहत सामग्री …

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पटरी से उतरकर ट्विटर पर चल रही रेलवे Purvanchal24

#इंडियन_रेलवे ऑन #Twitter कश्मीर की हसीन वादियों और चांद-चंद्रयान की रोमांचक स्टोरी से मन भर गया हो तो धरती पर लौट आइये, जहां हकीकत आपकी राह देख रही है। कितना अजीब है न… एक तरफ हम चांद के पार चलो का नगमा गुनगुना रहे है, तो दूसरी तरफ घर से निकलते ही मुसीबतों का पहाड़ राह में खड़ा है। देश …

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प्रेरणा एप : नेतागिरी की उफान में बेमानी लगने लगा यह नारा

संघे शक्ति कलियुगे के नारे के साथ जिस संगठन ने शासन को अपनी शक्ति से अवगत करवाया था, आज वही संगठन एक ही मांग के लिए अलग-अलग दरियों पर अलग-अलग माइक के साथ धरना देता है। जब नियोक्ता एक है। विभाग एक है। विभाग की कार्यप्रणाली एक है और सबकी प्रमुख समस्याएं एक ही हैं तो फिर दरियां अलग अलग …

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प्रेरणा ही नहीं और सख्त उपाय करने हों तो कर दीजिए, लेकिन शिक्षक और…

चिंता का विषय ये नहीं है कि प्रेरणा एप की सेल्फी से उपस्थित ली जाएगी, चिंता का विषय ये है कि सरकार को अध्यापकों पर विश्वास क्यों नहीं है ? जिन अध्यापकों से डेढ़ करोड़ बच्चों को पढ़वाया जा रहा है, MDM खिलवाया जा रहा है, बच्चों के लिए ड्रेस, जूता, स्वेटर और बैग वितरण करवाया जा रहा है, वही …

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Sunday स्पेशल : पति झगड़ता नहीं, ज्यादा मोहब्बत से घुटन होती है, इसलिए…

आमतौर पर पति-पत्नी के बीच झगड़ों के चलते तलाक की नौबत आती है, लेकिन यूएई में ऐसा मामला आया, जिसमें झगड़ा न होने पर महिला ने पति से तलाक मांग लिया। फजराह की शरिया कोर्ट पहुंची महिला ने कहा- उसका पति शरीफ और नेकदिल है। जबसे शादी हुई है, उसने कभी भी ऊंची आवाज में बात नहीं की। उल्टा, हमेशा …

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तरस आ रही है, ‘कहां गया जमाना-कहां आ गए हम’

जमाना बदल गया। अपनो को मजबूत करने की बजाय कमजोर करना ही हम बुद्धिमता समझते हैं। तरस आ रही है। कहां गया जमाना। कहां आ गए हम। एक समय था जब चार भाई में एक भाई को गांव, समाज, रिश्तेदारी को संभालने के लिए गांव पर रख दिया जाता था। जबकि पहले के अपेक्षाकृत बहुत कुछ परिवार में भरा है। …

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नाचे बीच बाजार… जोमैटो: अथ बाजार कथा

एक गाना याद आ रहा- इश्क नचाये जिसको यार, वो फिर नाचे बीच बाज़ार… खैर, गाने के आगे का हिस्सा छोड़िये, केवल पीछे के हिस्से पर बात करें। मुझे लगता है आज इश्क कम, बाजार ही ज्यादा हमें बाजार में नचा रहा है। जोमैटो इसका ताजा उदाहरण है। फंस गए बिचारे सुकुल जी। लेकिन, उन्होंने केवल ऑर्डर कैंसिल किया था। …

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